“डिजिटल इंडिया का वैश्विक प्रभाव: BRICS में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका”

ब्रिक्स डिजिटल परिवर्तन सत्र में भारत की अग्रणी भूमिका, ‘संचार साथी’, ‘आधार’ और ‘संगम’ पहलों ने बटोरीं सराहना

नई दिल्ली, 24 मई
भारत ने ब्रिक्स डिजिटल परिवर्तन पर आयोजित एक वर्चुअल क्षमता निर्माण सत्र की सफलतापूर्वक मेजबानी की, जिसे दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा राष्ट्रीय संचार अकादमी – प्रौद्योगिकी (NCA-T), गाजियाबाद के माध्यम से आयोजित किया गया। इस बहुपक्षीय संवाद मंच ने ब्रिक्स देशों के डिजिटल रणनीतिकारों को एकत्र कर, साझा चुनौतियों, नवाचारों और सहयोग के अवसरों पर विचार-विमर्श का अवसर दिया।

कार्यक्रम का उद्घाटन BRICS के अध्यक्ष श्री डेनियल कैवलकांति और भारत के NCA-T के महानिदेशक श्री अतुल सिन्हा ने संयुक्त रूप से किया। श्री कैवलकांति ने भारत की मेजबानी की सराहना करते हुए कहा कि यह सत्र मोबाइल सुरक्षा, साइबर प्रतिस्कंदन, डिजिटल अवसंरचना और डिजिटल ट्विन तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को सशक्त बनाने में सहायक होगा। श्री अतुल सिन्हा ने तकनीकी सहयोग, सुरक्षित और स्केलेबल समाधानों के सह-निर्माण तथा नागरिक सशक्तिकरण पर ज़ोर दिया।

कार्यक्रम के अंतर्गत चार विषयगत सत्रों में गहन तकनीकी चर्चाएं हुईं, जिनमें भारत की नवाचारी पहलों को वैश्विक मंच पर प्रमुखता मिली।

सत्र I: मोबाइल उपयोगकर्ताओं को सशक्त बनाना

भारत ने ‘संचार साथी’ पहल का प्रदर्शन किया, जिसका उद्देश्य मोबाइल उपयोगकर्ताओं को धोखाधड़ी से बचाना, पारदर्शिता बढ़ाना और सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करना है। इस सत्र में नागरिक-केंद्रित विनियामक ढांचे और डिजिटल विश्वास को बढ़ावा देने की आवश्यकता को रेखांकित किया गया।

सत्र II: 21वीं सदी के लिए साइबर प्रतिस्कंदन

भारत और ब्राज़ील ने साइबर प्रतिस्कंदन (resilience) पर अपने-अपने राष्ट्रीय दृष्टिकोण साझा किए। चर्चा में साइबर खतरों से निपटने हेतु तैयारियों, त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र और सीमा-पार सहयोग के महत्व को उजागर किया गया।

सत्र III: डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) की नींव

इस सत्र में भारत की ‘आधार’ प्रणाली को एक सफल डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसने पहचान-आधारित सेवाओं की पहुंच को लोकतांत्रिक बनाया। चीन ने भी अपने डिजिटल विकास अनुभव साझा किए। इस सत्र ने DPI को शासन की दक्षता और समावेशी सेवा वितरण के परिवर्तनकारी साधन के रूप में स्थापित किया।

सत्र IV: डिजिटल ट्विन – सार्वजनिक अवसंरचना में क्रांतिकारी बदलाव

भारत की ‘संगम’ डिजिटल ट्विन पहल ने विशेष ध्यान आकर्षित किया, जो AI-सक्षम फेडरेटेड प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से भविष्यसूचक योजना और रियल-टाइम गवर्नेंस को सक्षम बनाती है। चीन ने भी डिजिटल ट्विन तकनीक में अपने प्रयोग साझा किए। यह सत्र डेटा-संचालित शासन और पूर्वानुमान आधारित नीति निर्माण की क्षमताओं को उजागर करता है।

समापन भाषण में दूरसंचार विभाग के उप महानिदेशक (अंतर्राष्ट्रीय संबंध) श्री अविनाश अग्रवाल और BRICS अध्यक्ष श्री डेनियल कैवलकांति ने ब्रिक्स देशों के बीच डिजिटल सहयोग, पारस्परिक सीख और रणनीतिक गठबंधन को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

इस आयोजन ने न केवल राष्ट्रीय सफलता की कहानियों को साझा करने का मंच प्रदान किया, बल्कि ब्रिक्स

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