
मणिपुर में हालात एक बार फिर से तनावपूर्ण हो गए हैं। ताज़ा घटनाक्रम में एक पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) की संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या कर दी गई, जिससे राज्यभर में आक्रोश और चिंता फैल गई है। इस घटना के बाद राज्य प्रशासन ने सख्ती बरतते हुए कई छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, जिससे विवाद और गहरा गया है।
बताया जा रहा है कि यह वारदात तब हुई जब अधिकारी भीड़ को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश कर रहे थे। इस दौरान कुछ उपद्रवियों ने उन पर हमला कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। सरकार ने इस घटना को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ और ‘राज्य के कानून-व्यवस्था पर हमला’ बताया है।
हत्या के विरोध में कई छात्र संगठन सड़कों पर उतर आए। हालांकि, इन प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। पुलिस का कहना है कि कुछ छात्रों ने सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और भीड़ को उकसाया, जिसके चलते एफआईआर दर्ज की गई हैं। इन छात्रों पर हिंसा फैलाने, पुलिस पर हमला करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप हैं।
वहीं, छात्र संगठनों ने पुलिस की कार्रवाई को ‘दमनकारी’ बताते हुए इसे लोकतांत्रिक विरोध को कुचलने की कोशिश करार दिया है। उन्होंने मांग की है कि एफआईआर वापस ली जाए और मामले की निष्पक्ष जांच हो। राज्य सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों को सज़ा दिलाने का आश्वासन दिया है।
मणिपुर में पहले से ही जातीय और सामाजिक तनाव का माहौल है, और इस घटना ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। राज्य और केंद्र सरकार के लिए यह चुनौती है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए जनभावनाओं को भी संतुलित किया जाए।