
देश में एक बार फिर चुनावी सरगर्मियाँ तेज होती दिखाई दे रही हैं। 2026 में होने वाले असम और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों को लेकर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियाँ तेज कर दी हैं। भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।
असम में इस बार मुकाबला काफी दिलचस्प रहने की संभावना है। सत्तारूढ़ दल विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर के मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहा है, जबकि विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी और किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। पिछले कुछ महीनों में दोनों पक्षों ने जनसभाओं और रैलियों के जरिए अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश की है।
वहीं पश्चिम बंगाल में राजनीतिक समीकरण पहले से अधिक जटिल नजर आ रहे हैं। सत्तारूढ़ पार्टी अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए लगातार जमीनी स्तर पर सक्रिय है, जबकि विपक्ष राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है। पिछले चुनावों में वोट प्रतिशत में हुए बदलाव ने इस बार मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।
चुनावों को देखते हुए सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। चुनाव आयोग की ओर से निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन चुनावों के नतीजे केवल राज्य स्तर तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इनका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। ऐसे में सभी दल पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुके हैं।

