
भारत-ओमान CEPA: मोदी सरकार का 5वां FTA, मिडिल ईस्ट में बढ़ेगा भारत का दबदबा
भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) 1 जून 2026 से लागू हो गया है। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल का पांचवां बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) है। इससे पहले भारत यूएई, मॉरीशस, ऑस्ट्रेलिया और ईएफटीए देशों के साथ ऐसे समझौते कर चुका है।
इस समझौते के लागू होने से भारतीय वस्तुओं और सेवाओं को ओमान के बाजार में बड़ी पहुंच मिलेगी। साथ ही मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के बाजारों तक भारत की रणनीतिक पहुंच भी मजबूत होगी।
भारत को क्या होगा फायदा?
समझौते के तहत भारत को ओमान की 98.08% टैरिफ लाइनों पर 100% शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। इससे भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे और निर्यात को नई रफ्तार मिलेगी।
विशेष रूप से इन सेक्टरों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है:
* अपैरल और टेक्सटाइल
* कृषि उत्पाद और प्रोसेस्ड फूड
* रत्न एवं आभूषण
* ऑटोमोबाइल और परिवहन उपकरण
* इलेक्ट्रिकल मशीनरी
* समुद्री उत्पाद
* फार्मास्यूटिकल्स और वैक्सीन
* प्रीसिजन एवं इंडस्ट्रियल मशीनरी
भारतीय दवाओं और टीकों को ओमान में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलने से फार्मा इंडस्ट्री को बड़ा बूस्ट मिलेगा। वहीं भारतीय वाहन उद्योग को भी फायदा होगा क्योंकि वाहनों पर लगने वाला 5% आयात शुल्क समाप्त हो जाएगा।
सर्विस सेक्टर को मिलेगा बड़ा बूस्टर
भारत का ओमान को सेवाओं का निर्यात लगातार बढ़ रहा है। दूरसंचार, सूचना प्रौद्योगिकी, परिवहन और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ने की संभावना है।
कृषि क्षेत्र को भी लाभ
भारत के प्राकृतिक शहद, आलू, काजू, बेकरी उत्पाद और बोनलेस मीट जैसे कृषि उत्पाद ओमान में बिना ड्यूटी प्रवेश पा सकेंगे।
इसके बदले भारत ओमान से आने वाली खजूर पर सीमित मात्रा में जीरो-ड्यूटी एक्सेस देगा। साथ ही गम अरेबिका और फ्रैंकइंसेंस जैसे पारंपरिक ओमानी उत्पादों को भी टैरिफ राहत दी जाएगी।
मिडिल ईस्ट में मजबूत होगी भारत की स्थिति
यूएई के बाद ओमान के साथ यह समझौता भारत की खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती आर्थिक मौजूदगी का बड़ा संकेत माना जा रहा है। भारत जल्द ही कतर और GCC देशों के साथ भी बड़े व्यापारिक समझौतों की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
ओमान की भौगोलिक स्थिति इसे बेहद महत्वपूर्ण बनाती है क्योंकि यह होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित है, जो दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। यही वजह है कि ओमान भारत के लिए मिडिल ईस्ट और अफ्रीका तक पहुंच का रणनीतिक गेटवे माना जा रहा है।
विशेषज्ञों की राय
जानकारों का मानना है कि यह समझौता भारत के पश्चिम एशिया में आर्थिक प्रभाव को मजबूत करेगा, निर्यात बढ़ाएगा और निवेश के नए अवसर पैदा करेगा। साथ ही यह भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति को भी नई मजबूती देगा।

