आर्थिक दबावों के बावजूद विदेश यात्रा की मांग मजबूत, एबीटीए सर्वे में खुलासा

लंदन, 9 जून। वैश्विक अनिश्चितताओं, बढ़ती महंगाई और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बावजूद ब्रिटेन के उपभोक्ताओं में विदेश यात्रा को लेकर उत्साह बरकरार है। यात्रा उद्योग संगठन एबीटीए (द ट्रैवल एसोसिएशन) द्वारा जारी नए सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि बड़ी संख्या में लोग अगले एक वर्ष के दौरान विदेश यात्रा की योजना बना रहे हैं।

उपभोक्ता भावना सर्वेक्षण के अनुसार 64 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने अगले 12 महीनों में विदेश यात्रा करने की इच्छा जताई है। हालांकि यह आंकड़ा पिछले वर्ष के 70 प्रतिशत से कुछ कम है, फिर भी एबीटीए का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन की मांग उल्लेखनीय रूप से मजबूत बनी हुई है।

सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि 34 प्रतिशत उपभोक्ता आने वाले वर्ष में अपनी छुट्टियों पर खर्च बढ़ाने की योजना बना रहे हैं, जो दर्शाता है कि यात्रा अब भी लोगों की जीवनशैली और प्राथमिकताओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।

आर्थिक दबावों के बीच खर्चों में कटौती की बात आने पर अधिकांश लोगों ने कहा कि वे छुट्टियों के बजाय अन्य मदों में खर्च कम करना पसंद करेंगे। 55 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने रेस्तरां और बाहर खाने पर खर्च घटाने की बात कही, जबकि 45 प्रतिशत ने मनोरंजन गतिविधियों और 41 प्रतिशत ने कपड़ों एवं जूतों पर खर्च कम करने की इच्छा जताई। इसके विपरीत केवल 33 प्रतिशत लोगों ने विदेश यात्राओं पर खर्च घटाने की बात कही, जबकि घरेलू पर्यटन पर खर्च कम करने वालों का आंकड़ा 23 प्रतिशत रहा।

एबीटीए का अनुमान है कि इस वर्ष गर्मियों में अंतिम समय में यात्रा बुकिंग का रुझान मजबूत रहेगा। सर्वेक्षण के अनुसार लगभग 30 प्रतिशत यात्री अपनी यात्रा प्रस्थान से दो से चार सप्ताह पहले बुक करने की योजना बना रहे हैं, जबकि 10 प्रतिशत लोग यात्रा शुरू होने से दो सप्ताह से भी कम समय पहले बुकिंग कर सकते हैं।

अगले एक वर्ष में यात्रा करने की योजना बना रहे लोगों में से 38 प्रतिशत ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपनी छुट्टियों की बुकिंग फिलहाल टाल रखी है। इसके प्रमुख कारणों में हवाई किरायों में संभावित बदलाव का इंतजार (43 प्रतिशत), छुट्टियों की लागत पर नजर रखना (31 प्रतिशत), महंगाई की स्थिति में सुधार की उम्मीद (33 प्रतिशत) तथा पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़े घटनाक्रमों पर नजर रखना (36 प्रतिशत) शामिल हैं।

हालांकि छुट्टियां अब भी लोगों की प्राथमिकता बनी हुई हैं, लेकिन आर्थिक चिंताओं का असर उपभोक्ता निर्णयों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। 31 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने जीवन-यापन की बढ़ती लागत को यात्रा बुकिंग में सबसे बड़ी बाधा बताया। वहीं 20 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे अगले वर्ष छुट्टियों पर कम खर्च करेंगे, जबकि पिछले सर्वेक्षण में यह आंकड़ा 15 प्रतिशत था।

जो लोग अपने अवकाश बजट में कटौती कर रहे हैं, उनमें से 54 प्रतिशत ने इसका कारण घरेलू खर्चों में वृद्धि को बताया। यह आंकड़ा पिछले अध्ययन के 47 प्रतिशत की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है।

एबीटीए ने कहा कि यह निष्कर्ष केवल यात्रा उद्योग ही नहीं, बल्कि नीति निर्माताओं के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। ब्रिटेन का आउटबाउंड ट्रैवल क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में प्रतिवर्ष लगभग 52 अरब पाउंड का योगदान देता है और 8.18 लाख से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है।

यह अध्ययन वेस्टमिंस्टर में आयोजित एबीटीए के ‘ट्रैवल मैटर्स कॉन्फ्रेंस’ से पहले जारी किया गया, जिसमें सरकारी प्रतिनिधियों, उद्योग जगत के नेताओं और पर्यटन विशेषज्ञों ने यात्रा क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियों और नीतिगत प्राथमिकताओं पर चर्चा की। संगठन के प्रतिनिधियों ने सांसदों से मुलाकात कर आउटबाउंड पर्यटन क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक महत्व को भी रेखांकित किया।

एबीटीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क टैंजर ने कहा कि वैश्विक और आर्थिक अनिश्चितताएं यात्रा उद्योग के लिए चुनौतियां पैदा कर रही हैं तथा पश्चिम एशिया का संघर्ष परिचालन और उपभोक्ता विश्वास दोनों को प्रभावित कर रहा है।

उन्होंने कहा, “हमारे शोध से स्पष्ट है कि लोगों में यात्रा करने की इच्छा अभी भी बेहद मजबूत है और हमें आगामी ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन को लेकर सकारात्मक उम्मीदें हैं। बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा यात्रियों को बेहतर मूल्य प्रदान करने में मदद कर रही है।”

टैंजर ने यह भी कहा कि यात्रा कंपनियां बढ़ी हुई कारोबारी दरों और हवाई यात्री शुल्क जैसी अतिरिक्त लागतों का सामना कर रही हैं। ऐसे में उद्योग और सरकार के बीच रचनात्मक सहयोग पहले से अधिक आवश्यक हो गया है।

उन्होंने कहा कि यात्रा उद्योग ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा हुआ है। इसलिए दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करने और उद्योग की चुनौतियों का समाधान निकालने के लिए सरकार और निजी क्षेत्र के बीच मजबूत साझेदारी जरूरी है।

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