DPDP, GST और लेबर रिफॉर्म्स में तेज़ी आने के साथ होटलों को नियमों के पालन से जुड़े बड़े बदलावों का सामना करना पड़ रहा है।

भारत का हॉस्पिटैलिटी उद्योग नियमों के पालन के एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। डेटा सुरक्षा, GST नियमों और श्रम कानूनों में बड़े बदलावों का देश भर में होटल के कामकाज, लागत ढांचे और मेहमानों के डेटा मैनेजमेंट पर काफी असर पड़ने वाला है।

नियमों में हो रहे इन बदलावों पर ‘होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन (वेस्टर्न इंडिया)’ (HRAWI) द्वारा गोवा के फॉर्च्यून मिरामार में आयोजित HRAWI नॉलेज सीरीज़ के तीसरे संस्करण में चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के लीडर्स, कानूनी विशेषज्ञों और उद्योग के पेशेवरों ने होटलों और रेस्टोरेंट के लिए हालिया नीतिगत सुधारों के व्यावहारिक असर पर बातचीत की।

एक मुख्य सत्र ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट और रूल्स 2025’ पर केंद्रित था। इसमें इस बात पर जोर दिया गया कि नियमों का पालन करना अब केवल कानूनी जरूरत नहीं, बल्कि बिजनेस की एक अहम जरूरत बन गया है। चूंकि होटल मेहमानों, कर्मचारियों और वेंडरों का बहुत सारा डेटा संभालते हैं, इसलिए उद्योग के विशेषज्ञों ने बेहतर डेटा गवर्नेंस, साइबर सुरक्षा उपायों और प्राइवेसी प्रोटोकॉल की जरूरत पर जोर दिया।

सत्र के दौरान, अर्न्स्ट एंड यंग (EY) की टेक्नोलॉजी कंसल्टिंग की सीनियर मैनेजर मधुस्मिता पांडा ने कहा कि हॉस्पिटैलिटी बिजनेस को सहमति (कंसेंट) तंत्र, डेटा सुरक्षा प्रणालियों और डेटा लीक होने पर प्रतिक्रिया देने वाले प्रोटोकॉल को मजबूत करना चाहिए, साथ ही समय पर रिपोर्टिंग और जवाबदेही भी सुनिश्चित करनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “ग्राहकों का भरोसा बनाने और कामकाज में मजबूती लाने के लिए डेटा सुरक्षा नियमों का पालन करना बहुत जरूरी है। DPDP एक्ट का पालन न करने पर भारी जुर्माना लग सकता है और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है।”

कार्यक्रम में होटल सेक्टर पर असर डालने वाले अहम GST सुधारों पर भी प्रकाश डाला गया। विशेषज्ञों ने बताया कि ₹7,500 प्रति दिन तक के किराए वाले आवास पर अब बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के 5 प्रतिशत GST लगेगा, जबकि महंगे कमरे वाले होटलों पर ITC के साथ 18 प्रतिशत GST लगता रहेगा। इससे कई होटलों के लिए कामकाज और वित्त से जुड़ी नई चुनौतियां पैदा होंगी।

EY के ग्लोबल ट्रेड एंड कस्टम्स के डायरेक्टर अक्षत सरावगी के अनुसार, बदले हुए टैक्स ढांचे से नियमों के पालन से जुड़ी जटिलताएं बढ़ने की उम्मीद है, खासकर उन होटलों के लिए जो कई तरह के किराए वाले कमरों का संचालन करते हैं।

उन्होंने कहा, “होटलों को अपने ERP और POS सिस्टम की समीक्षा करनी चाहिए, इनवॉइस मिलान (रिकॉन्सिलिएशन) को मजबूत करना चाहिए और ऑडिट की कड़ी जांच के लिए तैयार रहना चाहिए। बदले हुए GST ढांचे के तहत ऑटोमेशन और पेशेवर टैक्स प्लानिंग बहुत महत्वपूर्ण होगी।”

एक और अहम चर्चा भारत के आगामी ‘नए श्रम कानूनों’ (New Labour Codes) पर केंद्रित थी, जिनसे हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में वर्कफोर्स मैनेजमेंट (कर्मचारी प्रबंधन) के तरीके बदलने की उम्मीद है। जानकारों का कहना है कि वेतन की बदली हुई परिभाषा और सोशल सिक्योरिटी, इंडस्ट्रियल रिलेशन और वर्कप्लेस सेफ्टी से जुड़े बदलावों के कारण कर्मचारियों पर होने वाला खर्च 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। ऐसे में होटलों को अपने कंपनसेशन स्ट्रक्चर, पेरोल सिस्टम और एम्प्लॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट पर फिर से विचार करना होगा।

EY में बिजनेस कंसल्टिंग के अंशुल शुक्ला ने हॉस्पिटैलिटी बिजनेस को तुरंत तैयारी शुरू करने की सलाह दी।

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