‘करुणा और तर्कसंगतता का संतुलन ही सुशासन की पहचान’: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने युवा IAS अधिकारियों को दिया संदेश

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से गुरुवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 2024 बैच के अधिकारियों ने राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की। वर्तमान में विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में सहायक सचिव के रूप में कार्यरत इन युवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने प्रशासनिक सेवा में संवेदनशीलता, नैतिकता और निर्णायक नेतृत्व के महत्व पर बल दिया।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि अखिल भारतीय सेवाओं, विशेष रूप से आईएएस अधिकारियों ने देश के विकास और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि भारत अब विकास के एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है, ऐसे में अधिकारियों से जनता की अपेक्षाएं भी पहले से अधिक बढ़ गई हैं।

उन्होंने युवा अधिकारियों को सलाह दी कि वे प्रशासनिक कार्यों में करुणा और तर्कसंगतता का संतुलन बनाए रखें। राष्ट्रपति ने कहा, “अधिकारियों को भावुक हुए बिना संवेदनशील होना होगा। नियमों का पालन करते हुए व्यापक जनहित और मानवीय दृष्टिकोण को भी केंद्र में रखना आवश्यक है।”

राष्ट्रपति ने कहा कि युवा अधिकारियों को विविध क्षेत्रों में कार्य करने और विशेषज्ञ टीमों का नेतृत्व करने के अवसर मिलेंगे। ऐसे में उन्हें तेजी से सीखने, बदलती परिस्थितियों के अनुरूप ढलने और जटिल चुनौतियों का समाधान निकालने की क्षमता विकसित करनी होगी।

उन्होंने कहा कि किसी अधिकारी की निष्पक्षता उसकी न्यायप्रियता को दर्शाती है, जबकि उसकी संवेदनशीलता समावेशी विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का मापदंड होती है। पारदर्शिता, निरंतर कार्य निष्पादन और सत्यनिष्ठा ही प्रशासनिक विश्वसनीयता की वास्तविक पहचान हैं।

राष्ट्रपति मुर्मु ने स्पष्ट किया कि नैतिकता का अर्थ निर्णय लेने से बचना नहीं, बल्कि जनहित और स्थापित व्यवस्था के अनुरूप सही एवं समयबद्ध निर्णय लेना है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक निर्णयों में अनावश्यक देरी लोगों को उनके वैध अधिकारों से वंचित करने के समान है।

लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों की भूमिका का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने अधिकारियों से जनता की आकांक्षाओं को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अधिकारियों को कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ता और समर्पण के साथ कार्य करना होगा।

अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने अधिकारियों से समाज के वंचित और कमजोर वर्गों को अपने निर्णयों और कार्यों के केंद्र में रखने की अपील की तथा विश्वास जताया कि वे विकसित, समावेशी और सशक्त भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

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