
राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में संचालित एक बड़े ई-सिगरेट तस्करी नेटवर्क के खिलाफ व्यापक अभियान चलाते हुए लगभग 120 करोड़ रुपये मूल्य की 3,00,000 प्रतिबंधित ई-सिगरेट और वेप्स जब्त की हैं।
डीआरआई द्वारा पिछले कुछ दिनों में विभिन्न बंदरगाहों, हवाई अड्डों और आईसीडी (इनलैंड कंटेनर डिपो) पर चलाए गए विशेष अभियानों के दौरान इस अंतरराज्यीय तस्करी रैकेट का खुलासा हुआ। कार्रवाई को हाल के वर्षों में ई-सिगरेट तस्करी के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है।
विशिष्ट खुफिया सूचनाओं के आधार पर एजेंसी ने कई संदिग्ध आयात खेपों की पहचान की, जिनमें सीमा शुल्क जांच से बचने के लिए गलत घोषणा (मिस-डिक्लेरेशन) की गई थी। डीआरआई अधिकारियों ने इन खेपों पर लगातार निगरानी रखी और बाद में उन्हें जब्त कर लिया। विस्तृत जांच के दौरान विभिन्न ब्रांड, फ्लेवर और मॉडल की करीब 3 लाख इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट और वेप्स बरामद किए गए।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये प्रतिबंधित उत्पाद चीन से आयात किए गए थे। तस्करों ने इन्हें “फर्नीचर” और “मेटल चेयर पार्ट्स” जैसी वस्तुओं के रूप में घोषित कर सीमा शुल्क अधिकारियों को गुमराह करने की कोशिश की।
गौरतलब है कि भारत में इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम (ENDS) पर इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम, 2019 के तहत पूर्ण प्रतिबंध लागू है। यह कानून सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा और युवाओं को निकोटीन की लत से बचाने के उद्देश्य से बनाया गया था।
डीआरआई ने संकेत दिए हैं कि मामले में आगे की जांच जारी है और इस तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों एवं संगठनों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।

