
नई दिल्ली, 9 जून। बजट एयरलाइन स्पाइसजेट एक बार फिर वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रही है। कंपनी के कई पायलटों को पिछले कुछ महीनों से समय पर वेतन नहीं मिल पाया है, जबकि एयरलाइन परिचालन को स्थिर बनाए रखने के लिए सरकार समर्थित ऋण योजना के तहत आपातकालीन वित्तीय सहायता जुटाने की कोशिश कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, बड़ी संख्या में पायलटों के वेतन का भुगतान मार्च माह से लंबित है, जो एयरलाइन की नकदी प्रवाह संबंधी समस्याओं को उजागर करता है। स्पाइसजेट ने स्वीकार किया है कि कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से वेतन दिया जा रहा है और कुछ भुगतान में देरी हुई है। हालांकि कंपनी का कहना है कि अधिकांश कर्मचारियों को मार्च का वेतन जारी किया जा चुका है।
एक समय घरेलू विमानन बाजार में लगभग 15 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ देश की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन रही स्पाइसजेट की स्थिति अब काफी कमजोर हो चुकी है। वर्तमान में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी लगभग 3.4 प्रतिशत है और वह भारतीय एयरलाइनों में चौथे स्थान पर है।
एयरलाइन की वित्तीय परेशानियां पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण और बढ़ गई हैं। इस संकट से विमानन ईंधन की कीमतों में वृद्धि हुई है तथा कई उड़ान मार्ग प्रभावित हुए हैं। इन परिस्थितियों का असर केवल स्पाइसजेट ही नहीं, बल्कि इंडिगो और एयर इंडिया जैसी बड़ी एयरलाइनों पर भी पड़ा है।
पायलटों के बीच प्रसारित आंतरिक संदेशों से वेतन भुगतान में देरी को लेकर बढ़ती चिंता सामने आई है। 26 मई को जारी एक संदेश में उड़ान संचालन विभाग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष वीरेन्द्र मल्होत्रा ने कथित तौर पर वेतन में देरी स्वीकार करते हुए जल्द भुगतान का आश्वासन दिया था। हालांकि बाद में उन्होंने ऐसे किसी संदेश के जारी होने से इनकार किया।
पायलटों का कहना है कि लगातार वेतन न मिलने से उनके ऊपर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है और दैनिक खर्चों के साथ-साथ अन्य आवश्यक वित्तीय जिम्मेदारियों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब विमानन उद्योग में पायलटों की मानसिक स्वास्थ्य और कार्य संबंधी तनाव पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
तरलता संकट से उबरने के लिए स्पाइसजेट भारत सरकार की **आपातकालीन ऋण गारंटी योजना (ईसीएलजीएस)** के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त करने का प्रयास कर रही है। इस योजना के अंतर्गत पात्र एयरलाइनों को 1,500 करोड़ रुपये तक का सरकारी गारंटी वाला ऋण सात वर्ष की पुनर्भुगतान अवधि के साथ उपलब्ध कराया जा सकता है।
कंपनी का कहना है कि परिचालन को सामान्य स्थिति में लाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं और आने वाले महीनों में कारोबारी परिस्थितियों में सुधार की उम्मीद है।
वित्तीय दबाव के बावजूद स्पाइसजेट अपने बेड़े के विस्तार की दिशा में भी कदम उठा रही है। एयरलाइन ने हाल ही में एक बोइंग 737 मैक्स विमान को दोबारा सेवा में शामिल किया है तथा तीन एयरबस ए320 विमानों के पट्टे का समझौता भी किया है। ये विमान जुलाई से परिचालन में शामिल किए जाने की योजना है ताकि बढ़ती यात्री मांग को पूरा किया जा सके।
बाजार में निवेशकों का रुख फिलहाल सतर्क बना हुआ है। इस वर्ष अब तक स्पाइसजेट के शेयरों में लगभग 60 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो विमानन क्षेत्र के व्यापक प्रदर्शन से कहीं अधिक है। वहीं एयरलाइन की निर्धारित उड़ानों की संख्या जनवरी में 4,494 से घटकर मई में 3,053 रह गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्पाइसजेट की मौजूदा चुनौतियां भारतीय विमानन क्षेत्र की व्यापक समस्याओं का हिस्सा हैं, जहां बढ़ती परिचालन लागत, तीव्र प्रतिस्पर्धा और आपूर्ति श्रृंखला संबंधी बाधाओं ने पिछले डेढ़ दशक में किंगफिशर एयरलाइंस, जेट एयरवेज और गो फर्स्ट जैसी कंपनियों के पतन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
स्पाइसजेट ने वर्ष 2019 के बाद अधिकांश वित्तीय वर्षों में घाटा दर्ज किया है। हालांकि मार्च 2025 को समाप्त वित्तीय वर्ष में कंपनी ने सीमित लाभ दिखाया था, जिसका प्रमुख कारण विमान पट्टादाताओं के साथ हुए समझौतों से प्राप्त एकमुश्त लाभ था। उद्योग सूत्रों के अनुसार, इस वर्ष कम से कम दो पट्टादाता कंपनियों ने भुगतान चूक को लेकर एयरलाइन को नोटिस भी जारी किए हैं, हालांकि स्पाइसजेट ने इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नई वित्तीय सहायता जुटाने और परिचालन क्षमता को पुनर्स्थापित करने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों के बीच आने वाले कुछ महीने स्पाइसजेट के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे। एयरलाइन की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता और परिचालन पुनरुद्धार काफी हद तक इन्हीं प्रयासों की सफलता पर निर्भर करेगा।

