AI और ऑटोमेशन : MSMEs के लिए नया आयाम

मैन्युफैक्चरिंग MSMEs में AI और ऑटोमेशन

नई दिल्ली, दिल्ली, भारत

भारत की मैन्युफैक्चरिंग MSMEs केवल छोटे व्यवसायों तक सीमित नहीं हैं। वे रोजगार, नवाचार, निर्यात और देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। बड़ी औद्योगिक इकाइयों को जरूरी सामान उपलब्ध कराने से लेकर घरेलू सप्लाई नेटवर्क को मजबूत करने तक, MSMEs भारतीय मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम का अहम हिस्सा हैं।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लाखों परिवारों की आजीविका भी इन इकाइयों से जुड़ी है। ऐसे में देश के विकास और औद्योगिक प्रगति के लिए MSMEs की सफलता महत्वपूर्ण हो जाती है।

हालांकि, आज भारतीय MSMEs के सामने कई नई चुनौतियां हैं। कच्चे माल और मजदूरी की लागत बढ़ रही है, ग्राहकों की अपेक्षाएं बदल रही हैं और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही बेहतर गुणवत्ता बनाए रखने और कम समय में उत्पादों की डिलीवरी करने का दबाव भी बढ़ा है।

इन बदलावों के बीच पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में MSMEs के लिए नई डिजिटल तकनीकों को अपनाना तेजी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है।

MSME में AI और ऑटोमेशन क्यों जरूरी हो रहे हैं?

बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए MSMEs को अपने कामकाज के तरीकों को आधुनिक बनाने की जरूरत है। अब सवाल केवल यह नहीं है कि नई डिजिटल तकनीक अपनाई जाए या नहीं, बल्कि यह है कि इसे किफायती और सही तरीके से कैसे लागू किया जाए।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सही तरीके और जिम्मेदारी के साथ इन तकनीकों का इस्तेमाल किया जाए तो कंपनियां अपनी उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने के साथ कर्मचारियों के लिए भी बेहतर कार्य वातावरण तैयार कर सकती हैं।

AI और ऑटोमेशन का उद्देश्य केवल इंसानों की जगह लेना नहीं है। इनका इस्तेमाल कर्मचारियों को बेहतर डिजिटल टूल उपलब्ध कराने और उन्हें अधिक प्रभावी तरीके से काम करने में मदद करने के लिए भी किया जा सकता है।

महज ऑटोमेशन नहीं, रणनीतिक बदलाव की जरूरत

भारत में AI को लेकर होने वाली चर्चा अक्सर इसकी तकनीकी क्षमताओं तक सीमित रहती है। लेकिन MSMEs के लिए AI का वास्तविक महत्व उन व्यावहारिक फायदों में है, जो मैन्युफैक्चरिंग और रोजमर्रा के कामकाज में दिखाई दे सकते हैं।

सुरक्षित कार्यस्थल, बेहतर उत्पादकता, मजबूत उद्योग और नए आर्थिक अवसर ऐसे क्षेत्र हैं जहां तकनीक का प्रभाव देखा जा सकता है। AI कर्मचारियों को आधुनिक टूल उपलब्ध कराकर उन्हें अधिक प्रभावी तरीके से काम करने और कंपनी में महत्वपूर्ण योगदान देने में मदद कर सकता है।

मैन्युफैक्चरिंग में AI से डेटा आधारित फैसले

AI का एक प्रमुख फायदा मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े बड़े पैमाने के डेटा का विश्लेषण करना है। मशीनों के प्रदर्शन, प्रोडक्शन रिकॉर्ड और सप्लाई चेन से जुड़ी जानकारी का विश्लेषण करके AI सिस्टम पैटर्न पहचान सकते हैं।

इन पैटर्न के आधार पर संभावित रुकावटों का पहले से अनुमान लगाया जा सकता है। इससे कंपनियों को समस्याएं गंभीर होने से पहले आवश्यक कदम उठाने में मदद मिल सकती है।

दूसरी ओर, रोबोटिक वेल्डिंग, भारी सामान उठाने वाली ऑटोमैटिक मशीनें, इंसानों के साथ काम करने वाले कोलैबोरेटिव रोबोट्स और स्मार्ट पैकेजिंग जैसी ऑटोमेशन तकनीकें भी मैन्युफैक्चरिंग में अपनी जगह बना रही हैं।

ऐसी तकनीकें बार-बार दोहराए जाने वाले या अधिक शारीरिक मेहनत वाले काम संभाल सकती हैं। इससे कर्मचारी क्वालिटी कंट्रोल, मशीनों के रखरखाव और ग्राहकों से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों पर ज्यादा ध्यान दे सकते हैं।

एजेंटिक AI का बढ़ता इस्तेमाल

एजेंटिक AI (Agentic AI) तकनीक की दुनिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में सामने आया है। पारंपरिक सॉफ्टवेयर की तुलना में Agentic AI सिस्टम तय नियमों और लक्ष्यों के आधार पर कई कार्यों की निगरानी, विकल्पों की तुलना और कुछ रोजमर्रा के निर्णयों को स्वचालित करने में मदद कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए, एक प्रोडक्शन प्लानिंग एजेंट ग्राहकों के ऑर्डर, मशीनों की उपलब्धता, कर्मचारियों की शिफ्ट, इन्वेंट्री और डिलीवरी शेड्यूल जैसी जानकारी को एक साथ देख सकता है।

प्रोडक्शन में संभावित रुकावट की स्थिति में ऐसा सिस्टम समस्या की पहचान करने और संभावित समाधान सुझाने में मदद कर सकता है।

AI आधारित प्रोक्योरमेंट और इन्वेंट्री मैनेजमेंट

इसी तरह, एक प्रोक्योरमेंट एजेंट स्टॉक की स्थिति पर नजर रखने, भविष्य में कच्चे माल की जरूरत का अनुमान लगाने और अलग-अलग सप्लायर्स की तुलना करने में मदद कर सकता है।

यह मैनेजर की मंजूरी के लिए परचेज ऑर्डर तैयार करने जैसे कार्यों को भी आसान बना सकता है। इससे स्टॉक-आउट की संभावना कम करने, अतिरिक्त इन्वेंट्री को नियंत्रित करने और वर्किंग कैपिटल के बेहतर प्रबंधन में मदद मिल सकती है।

ऐसी तकनीकों के इस्तेमाल से बिजनेस मालिकों और मैनेजरों को रोजमर्रा के समन्वय से जुड़े कार्यों में कम समय लगाना पड़ सकता है। वे अपना अधिक समय बिजनेस ग्रोथ, इनोवेशन और ग्राहकों के साथ बेहतर संबंध बनाने में लगा सकते हैं।

प्रोडक्टिविटी से लेकर राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा तक

AI के फायदे केवल काम को आसान और तेज बनाने तक सीमित नहीं हैं। इनका प्रभाव मशीनों के रखरखाव, उत्पाद की गुणवत्ता, इन्वेंट्री और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर भी पड़ सकता है।

प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस तकनीक मशीन में खराबी आने से पहले संभावित समस्या की पहचान करने में मदद करती है। इससे अनियोजित डाउनटाइम को कम करने और मशीनों के बेहतर इस्तेमाल में मदद मिल सकती है।

इसी तरह, इंटेलिजेंट इंस्पेक्शन सिस्टम खराब उत्पादों और कच्चे माल की बर्बादी को कम करने में मदद कर सकते हैं। AI आधारित इन्वेंट्री मैनेजमेंट कंपनी के वर्किंग कैपिटल के इस्तेमाल को बेहतर बनाने में भी उपयोगी हो सकता है।

प्रशासनिक और कागजी प्रक्रियाओं के ऑटोमेशन से फाइनेंस और ऑपरेशन्स टीमें रणनीतिक फैसलों पर अधिक ध्यान दे सकती हैं।

एक रिपोर्ट के हवाले से मैन्युफैक्चरिंग में प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस के कारण डाउनटाइम में लगभग 30 प्रतिशत तक कमी का उल्लेख किया गया है।

स्रोत: Times of India

कुल मिलाकर, ऐसे बदलाव भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए मजबूत बनाने में योगदान दे सकते हैं। साथ ही, इससे अधिक मजबूत और व्यवस्थित सप्लाई चेन तैयार करने में भी मदद मिल सकती है।

MSMEs के लिए AI अपनाना कितना महंगा है?

AI और इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन को लेकर एक आम धारणा यह रही है कि इन्हें अपनाने के लिए बहुत बड़े निवेश की जरूरत होती है। हालांकि, क्लाउड कंप्यूटिंग, Software-as-a-Service (SaaS) मॉडल और इंडस्ट्रियल AI प्लेटफॉर्म में हुए विकास ने कई आधुनिक तकनीकों को छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए भी अधिक सुलभ बनाया है।

आज कई इंडस्ट्रियल AI और ऑटोमेशन समाधान विशेष रूप से मैन्युफैक्चरिंग जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किए जा रहे हैं।

MSMEs के लिए उपयोगी AI और इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी समाधान

  • Siemens Industrial Copilot: यह AI आधारित इंडस्ट्रियल असिस्टेंट है, जिसे इंजीनियरिंग, मशीन मेंटेनेंस और मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन्स में सहायता के लिए विकसित किया गया है।
  • PTC ThingWorx: यह एक इंडस्ट्रियल IoT और डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो मशीनों की रियल-टाइम निगरानी, प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस और इंडस्ट्रियल ऑपरेशन्स को बेहतर बनाने में मदद करता है।
  • GE Digital Asset Performance Management (APM): यह प्लेटफॉर्म मशीनों की विश्वसनीयता, संभावित खराबियों और जोखिमों की निगरानी से जुड़े कार्यों में इस्तेमाल किया जाता है।
  • Sight Machine: यह शॉप-फ्लोर से मिलने वाले डेटा को उपयोगी इनसाइट्स में बदलने में मदद करता है, जिससे प्रोडक्ट क्वालिटी और उत्पादन प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।
  • Augury: यह AI की मदद से मशीनों की स्थिति और उनके प्रदर्शन से जुड़े डेटा का विश्लेषण करता है, ताकि संभावित खराबियों की पहचान पहले की जा सके।
  • Detect Technologies और Robro Systems: ये भारतीय तकनीकी कंपनियां इंडस्ट्रियल इंस्पेक्शन, सुरक्षा निगरानी और AI आधारित क्वालिटी कंट्रोल जैसे क्षेत्रों में समाधान विकसित कर रही हैं।

MSMEs को AI अपनाने की शुरुआत कहां से करनी चाहिए?

MSMEs के लिए AI अपनाने का व्यावहारिक तरीका एक साथ बहुत बड़े बदलाव करने के बजाय छोटे और स्पष्ट परिणाम देने वाले प्रयोगों से शुरुआत करना हो सकता है।

उदाहरण के लिए, कंपनियां पहले प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस, AI आधारित विजुअल इंस्पेक्शन या स्मार्ट प्रोडक्शन प्लानिंग जैसे हाई-इम्पैक्ट क्षेत्रों पर ध्यान दे सकती हैं।

इन शुरुआती परियोजनाओं से मिलने वाले परिणामों को मापने के बाद कंपनियां धीरे-धीरे अन्य प्रक्रियाओं और प्लांट्स में भी AI और ऑटोमेशन का विस्तार कर सकती हैं।

सरकार और पॉलिसी मेकर्स की भूमिका

AI और इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन को व्यापक स्तर पर अपनाने के लिए सरकार और पॉलिसी मेकर्स की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। MSMEs को तकनीक अपनाने में वित्तीय और तकनीकी बाधाओं को कम करने के लिए कई स्तरों पर कदम उठाए जा सकते हैं।

  • सब्सक्रिप्शन आधारित तकनीकी समाधानों को बढ़ावा देना, ताकि कंपनियों को शुरुआत में बड़े पूंजीगत निवेश की जरूरत कम हो।
  • Industry 4.0 तकनीकों को अपनाने वाले MSMEs के लिए विशेष ग्रांट और पायलट प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देना।
  • विश्वविद्यालयों और ITIs में AI तथा मैन्युफैक्चरिंग इनोवेशन सेंटर स्थापित करना।
  • ऐसे इंटरऑपरेबिलिटी स्टैंडर्ड विकसित करना, जिनसे नई तकनीक पुरानी मशीनों के साथ आसानी से जुड़ सके।
  • डिजिटल रूप से सक्षम मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में कर्मचारियों के लिए रीस्किलिंग और अपस्किलिंग कार्यक्रमों को बढ़ावा देना।
  • युवाओं को आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग और तकनीकी क्षेत्रों में करियर के अवसरों के बारे में जागरूक करना।

ऐसे कदम कंपनियों के वित्तीय और ऑपरेशनल जोखिम को कम करने के साथ भारत के मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क में नई तकनीकों को अपनाने की गति बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

AI और ऑटोमेशन में मानवीय पहलू

नई तकनीक को अपनाने की प्रक्रिया तभी सफल हो सकती है जब कर्मचारी भी इस बदलाव का हिस्सा हों। ऑटोमेशन के कारण नौकरियों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर कर्मचारियों के बीच चिंता हो सकती है। ऐसे में उनके कौशल विकास और नई तकनीकों की ट्रेनिंग पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।

ऑटोमेशन कई मामलों में काम की प्रकृति को बदल सकता है। मशीनों की निगरानी, क्वालिटी मैनेजमेंट, डिजिटल ऑपरेशन्स, ग्राहक प्रबंधन और डेटा आधारित निर्णय लेने जैसी नई भूमिकाएं विकसित हो सकती हैं।

इसलिए अपस्किलिंग और रीस्किलिंग को AI और ऑटोमेशन से जुड़े किसी भी कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाना चाहिए। कर्मचारियों को नई डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करना यह सुनिश्चित करने में मदद कर सकता है कि तकनीकी बदलाव का लाभ अधिक लोगों तक पहुंचे।

पॉलिसी मेकर्स और संस्थानों की भूमिका

AI को जिम्मेदारी के साथ अपनाने के लिए सरकार, सार्वजनिक संस्थानों, वित्तीय संस्थानों, टेक्नोलॉजी कंपनियों और शिक्षा जगत के बीच सहयोग की जरूरत है।

इन संस्थानों के बीच सहयोग से जमीनी जरूरतों के आधार पर ऐसा इकोसिस्टम तैयार किया जा सकता है, जिसमें MSMEs को नई तकनीक को समझने और लागू करने में सहायता मिले।

CSR फंड के माध्यम से पायलट प्रोजेक्ट्स को समर्थन देना, तकनीक के प्रदर्शन के लिए डेमो सेंटर स्थापित करना और इंडस्ट्री के लिए सामान्य तकनीकी मानक विकसित करना ऐसे कदम हो सकते हैं, जो नई तकनीकों को अपनाने की प्रक्रिया को आसान बनाएं।

भारतीय MSMEs के लिए AI का भविष्य

भारत एक ऐसे औद्योगिक दौर में प्रवेश कर रहा है जहां AI और ऑटोमेशन केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रह गए हैं। ये तकनीकें धीरे-धीरे MSMEs के लिए भी व्यावहारिक टूल बन रही हैं।

आगे का रास्ता पुरानी व्यवस्थाओं को अचानक बदलने के बजाय चरणबद्ध और जिम्मेदार आधुनिकीकरण का है। नई तकनीक को कर्मचारियों के विकास, निवेश और व्यावहारिक परिणामों के साथ जोड़ना जरूरी होगा।

सही रणनीति के साथ MSMEs अपनी उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने के साथ रोजगार और आर्थिक अवसरों में भी योगदान दे सकते हैं।

भारतीय मैन्युफैक्चरिंग का भविष्य केवल इस बात पर निर्भर नहीं करेगा कि कौन सबसे तेजी से ऑटोमेशन अपनाता है। महत्वपूर्ण यह भी होगा कि कंपनियां स्पष्ट लक्ष्यों, कर्मचारियों की भागीदारी और व्यावहारिक परिणामों के साथ आधुनिकीकरण को कैसे आगे बढ़ाती हैं।

यदि इस अवसर को योजनाबद्ध तरीके से अपनाया जाता है, तो भारतीय MSMEs वैश्विक बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत करने और घरेलू अर्थव्यवस्था में अधिक योगदान देने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

आलेख: मनोज लाल
Manoj Lal – LinkedIn

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