क्वांटस नॉन-स्टॉप सिडनी-लंदन उड़ानों के साथ लंबी दूरी की यात्रा को नए सिरे से परिभाषित करने के लिए तैयार है।

कमर्शियल एविएशन एक और ऐतिहासिक पड़ाव पार करने जा रहा है क्योंकि क्वांटास (Qantas) अक्टूबर 2027 से सिडनी और लंदन के बीच पहली बार नॉन-स्टॉप उड़ानें शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इससे लंबी दूरी की हवाई यात्रा में बची-खुची बड़ी बाधाओं में से एक खत्म हो जाएगी।

यह सेवा पहली बार ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी तट से यूनाइटेड किंगडम तक मशहूर ‘कंगारू रूट’ पर नॉन-स्टॉप उड़ान की सुविधा देगी। इससे उन पारंपरिक स्टॉपओवर (बीच में रुकने की जगहों) की ज़रूरत खत्म हो जाएगी, जो दशकों से इन दोनों देशों के बीच यात्रा का हिस्सा रहे हैं। खास तौर पर डिज़ाइन किए गए एयरबस A350-1000ULR विमानों से होने वाली ये उड़ानें 16,000 किलोमीटर से ज़्यादा की दूरी तय करेंगी और 22 घंटे तक हवा में रहेंगी।

यह लॉन्च ‘प्रोजेक्ट सनराइज़’ का नतीजा है। यह क्वांटास की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका मकसद अल्ट्रा-लॉन्ग-हॉल (बहुत लंबी दूरी की) उड़ानों के ज़रिए ऑस्ट्रेलिया को दुनिया की प्रमुख जगहों से सीधे जोड़ना है। उम्मीद है कि यह नया रूट मौजूदा वन-स्टॉप सेवाओं की तुलना में यात्रा के समय को चार घंटे तक कम कर देगा और यात्रियों को दुनिया के दो सबसे ज़्यादा जुड़े हुए शहरों के बीच बिना किसी रुकावट के यात्रा करने का मौका देगा।

इंडस्ट्री के जानकार इस घटनाक्रम को ग्लोबल एविएशन के लिए एक अहम मोड़ मानते हैं। जैसे पिछली कुछ दशकों में लंबी दूरी के जेट विमानों ने इंटरनेशनल यात्रा को बदल दिया था, वैसे ही अल्ट्रा-लॉन्ग-हॉल उड़ानें एयरलाइंस के नेटवर्क प्लानिंग और यात्रियों की सुविधा के नज़रिए को तेज़ी से बदल रही हैं।

क्वांटास की रिसर्च से पता चलता है कि नॉन-स्टॉप लंबी दूरी की यात्रा की ज़बरदस्त मांग है और ज़्यादातर ऑस्ट्रेलियाई यात्री सीधी अल्ट्रा-लॉन्ग-हॉल सेवाओं में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। एयरलाइन के मौजूदा नॉन-स्टॉप रूट पहले ही उसके इंटरनेशनल नेटवर्क में सबसे ज़्यादा कस्टमर सैटिस्फैक्शन स्कोर (ग्राहकों की संतुष्टि) हासिल कर चुके हैं।

सिडनी-लंदन सेवा के बाद सिडनी-न्यूयॉर्क ऑपरेशन शुरू होगा और आने वाले सालों में ‘प्रोजेक्ट सनराइज़’ के तहत और भी जगहों के लिए उड़ानें शुरू होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि ये रूट पारंपरिक ट्रांज़िट हब पर निर्भरता कम करके और दूर के बाज़ारों को एक-दूसरे के करीब लाकर ग्लोबल कनेक्टिविटी को नए सिरे से परिभाषित करेंगे।

यह सिर्फ़ एक नए रूट की घोषणा नहीं है, बल्कि एविएशन के इतिहास में एक अहम पल है। यह दिखाता है कि कैसे विमान टेक्नोलॉजी में हो रही तरक्की दुनिया को लगातार छोटा कर रही है और लंबी दूरी की यात्रा के भविष्य को बदल रही है।

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