
भारत का सकल वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह मई 2026 में अप्रैल के रिकॉर्ड स्तर से घटकर ₹1.94 लाख करोड़ पर आ गया। हालांकि, यह आंकड़ा पिछले वर्ष मई 2025 के ₹1.88 लाख करोड़ की तुलना में 3.2% अधिक रहा। रविवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में जीएसटी संग्रह ₹2.42 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था।
मई 2026 में शुद्ध GST राजस्व 3.3% बढ़कर ₹1.67 लाख करोड़ रहा, जबकि एक वर्ष पहले यह ₹1.62 लाख करोड़ था। इसी दौरान कुल रिफंड 2.6% बढ़कर ₹27,281 करोड़ हो गया। चालू वित्त वर्ष में अब तक कुल रिफंड 10.9% बढ़कर ₹59,063 करोड़ दर्ज किया गया।
आंकड़ों के मुताबिक, GST संग्रह में वृद्धि का मुख्य आधार आयात से मिलने वाला राजस्व रहा। आयात से प्राप्त सकल GST राजस्व 19.1% बढ़कर ₹59,654 करोड़ पहुंच गया, जबकि घरेलू स्रोतों से मिलने वाला सकल राजस्व 2.6% घटकर ₹1.35 लाख करोड़ रह गया। शुद्ध आधार पर कस्टम GST संग्रह 19.7% बढ़कर ₹49,403 करोड़ हो गया, जबकि घरेलू शुद्ध राजस्व 2.3% गिरकर ₹1.18 लाख करोड़ पर आ गया।
वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों में सकल GST संग्रह 6.2% बढ़कर ₹4.37 लाख करोड़ रहा, जबकि शुद्ध GST राजस्व 5.5% बढ़कर ₹3.78 लाख करोड़ हो गया। अप्रैल-मई के दौरान घरेलू सकल राजस्व में केवल 1.3% की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि आयात आधारित राजस्व 22.3% उछलकर ₹1.17 लाख करोड़ पहुंच गया। इससे स्पष्ट है कि कुल GST संग्रह में आयात आधारित करों का योगदान लगातार मजबूत बना हुआ है।
राज्यवार आंकड़ों में मिश्रित तस्वीर देखने को मिली। मई में कर्नाटक के प्री-सेटलमेंट SGST संग्रह में 11% वृद्धि हुई, जबकि महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश में क्रमशः 8%, 11% और 9% की बढ़त दर्ज की गई। केरल में 19% की मजबूत वृद्धि देखने को मिली, जबकि गुजरात में 3% का इजाफा हुआ। दूसरी ओर, दिल्ली में प्री-सेटलमेंट SGST संग्रह में 36% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। तमिलनाडु और राजस्थान में भी मामूली कमी देखने को मिली।
IGST सेटलमेंट के बाद कर्नाटक के SGST राजस्व में 17% की वृद्धि हुई। गुजरात और आंध्र प्रदेश में 16%, केरल में 15% और तेलंगाना में 14% की बढ़त दर्ज की गई। हरियाणा में 22% की मजबूत वृद्धि रही, जबकि दिल्ली में पोस्ट-सेटलमेंट संग्रह 26% घट गया।
ताजा आंकड़े संकेत देते हैं कि घरेलू खपत आधारित कर संग्रह में नरमी देखने को मिल रही है, जबकि आयात आधारित राजस्व अब भी GST वृद्धि को सहारा दे रहा है।
प्राइस वाटरहाउस एंड कंपनी के पार्टनर प्रतीक जैन ने कहा कि GST 2.0 के बाद मासिक संग्रह में 7-8% की स्थिर वृद्धि अब सामान्य प्रवृत्ति बनती दिख रही है, जो बजट अनुमान के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि आयात आधारित राजस्व की वृद्धि घरेलू लेनदेन की तुलना में तेज बनी हुई है, जो उपभोक्ता खर्च में नरमी और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के असर का संकेत हो सकता है।

