
भारत की सबसे बड़ी बैकपैकर हॉस्टल चेन, ज़ोस्टेल की ‘द साउंड ऑफ़ द रूट’ रिपोर्ट के अनुसार, म्यूज़िक फ़ेस्टिवल भारत में ट्रैवल को बढ़ावा देने वाले सबसे बड़े कारणों में से एक बनकर उभर रहे हैं। अब हर तीन में से एक ‘जेन ज़ी’ (Gen Z) ट्रैवलर पारंपरिक छुट्टियों के बजाय फ़ेस्टिवल ट्रिप को प्राथमिकता दे रहा है।
रिपोर्ट बताती है कि म्यूज़िक-बेस्ड ट्रैवल अब कोई छोटा-मोटा सेगमेंट नहीं, बल्कि तेज़ी से बढ़ता हुआ टूरिज़्म ट्रेंड है। म्यूज़िक पर केंद्रित ग्रुप ट्रिप की बुकिंग हर साल चार से पाँच गुना बढ़ रही है, जबकि अरुणाचल प्रदेश में ‘ज़िरो फ़ेस्टिवल ऑफ़ म्यूज़िक’ जैसे फ़ेस्टिवल की मांग सात से आठ गुना बढ़ गई है। यह ट्रैवल से जुड़े फ़ैसलों पर लाइव इवेंट्स के बढ़ते असर को दिखाता है।
युवा ट्रैवलर्स अपनी ट्रिप को फ़ेस्टिवल से आगे भी बढ़ा रहे हैं। ज़्यादातर ट्रिप अब पाँच से आठ रातों की होती हैं, जिनमें कॉन्सर्ट के साथ-साथ लोकल साइटसीइंग, ट्रेकिंग, कैफ़े कल्चर और सांस्कृतिक अनुभव शामिल होते हैं, जिससे डेस्टिनेशन की इकॉनमी को काफ़ी बढ़ावा मिलता है।
रिपोर्ट के अनुसार, 80 प्रतिशत ट्रैवलर्स ये ट्रिप अकेले बुक करते हैं, लेकिन कई लोग नई दोस्ती के साथ लौटते हैं, जो सोशल और कम्युनिटी-बेस्ड अनुभव के तौर पर म्यूज़िक फ़ेस्टिवल की बढ़ती भूमिका को उजागर करता है।
इसका आर्थिक असर भी उतना ही महत्वपूर्ण है। भारत की लाइव इवेंट्स इंडस्ट्री की वैल्यू अभी लगभग 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर है और यह सालाना लगभग 20 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। रिपोर्ट का अनुमान है कि म्यूज़िक टूरिज़्म की वैल्यू पहले से ही 2.4-2.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर है और अगले सात से आठ वर्षों में यह बढ़कर 14-15 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो सकती है। इसमें यह भी बताया गया है कि कॉन्सर्ट टिकट पर खर्च किए गए हर ₹1 से ट्रांसपोर्ट, रहने की जगह, खाने-पीने और लोकल रिटेल पर ₹3 से ₹3.5 का अतिरिक्त खर्च होता है।
पूर्वोत्तर भारत के म्यूज़िक टूरिज़्म के क्षेत्र में सबसे आगे बना हुआ है, जहाँ अरुणाचल प्रदेश और मेघालय के फ़ेस्टिवल देश भर से ट्रैवलर्स को आकर्षित करते हैं। गुवाहाटी जैसे शहर भी इंटरनेशनल कॉन्सर्ट और डेस्टिनेशन-बेस्ड इवेंट्स की मदद से बड़े लाइव एंटरटेनमेंट हब के रूप में उभर रहे हैं।

